कैसे होते हैं CoBRA कमांडो, जिन्हें अब नक्सलियों से लड़ने भेजा जा रहा है

Commando Battalion for Resolute Action

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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमलों की हद हो चुकी है. नक्सली कुछ ऐसे साउंड होने लग गए हैं, मानो इनका कोई इलाज ही नहीं है. तो अब उनके निपटारे के लिए “ऑपरेशन ऑल आउट” चलाया गया है. और कमान दी गई है CoBRA कमांडोज को. कोबरा माने Commando Battalion for Resolute Action. जिनका मोटो होता है. “Glory or Death” उनकी मदद से केंद्र सरकार ने पूरे उस रेड कॉरीडोर को निशाने पर लिया है, जहां हिडिमा जैसे नक्सली छुप-छुपाकर रहते हैं और चोरी छुपे वार करते हैं.

हाल ही के एक हमले में हमने पच्चीसों जवानों खोया है. ये झटका सरकार के लिए भी था. इसलिए पूरे इलाके में कोबरा बटालियन के दो हजार जांबाजों को तैनात करने का फैसला लिया गया. कोबरा कमांडो भारत की उन 8 स्पेशलाइज फोर्सेज में से हैं, जिन्हें हर तरह की सिचुएशन में लड़ने की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है. इनके पास हाईटैक वेपन सिस्टम भी हैं और लेटेस्ट तकनीक भी.

जानिए ऑपरेशन ऑल आउट चलेगा कैसे?

जंगल मे कुछ भी करना मुश्किल होता है. फिल्मों में भी अगर थोड़ा बहुत आपने देखा होगा तो ये जाना होगा कि जंगल की लड़ाई के कायदे अलग ही होते हैं. वहां बचना मुश्किल होता है, और मरना आसान. इसी क्रम में वहां छुपना बहुत आसान होता है और मारना भी. नक्सली जिस चीज का सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं वो है उनका छुपना, और माइंस. इसलिए बेल्जियन मेलिनोइस किस्म के कुत्ते इस्तेमाल किए जाएंगे. जो IED के डिटेक्शन में भी पूरी मदद करते हैं, याद रहे ओसामा बिन लादेन को भी जब खोजा जाता था तो बेल्जियन मेलनोइस किस्म के खोजी कुत्ते ही साथ होते थे.

और तो और अब ये नाला में छुपकर भागने या नदी के रास्ते भागने की होशियारी भी न चलेगी, और नक्सली वो करते थे न कि एम्बुश लगाकर जान लेते थे. उसकी भी काट इन कमांडोज के पास है. भगवान और कमांडो जब मारते हैं तो छप्पर फाड़ के मारते हैं. आई मीन टू से दैट कि अब आसमान से भी नक्सलियों के बुरे दिन आने को हैं, काहे कि सूं-सां वाले ड्रोन भी इस्तेमाल किए जाएंगे. ये पेड़ों पर लटक जाने वाले नक्सली बच न पाएंगे, क्योंकि घोसलेवाले नक्सलियों के घोसलों की मैपिंग भी छोटे हवाईकॉप्टर माने ड्रोन से हो रही है.

रैम्बो पिक्चर देखी ही होगी आपने. अगर नहीं देखी तो गलती आपकी ही है. उसमें रैम्बो एक तीर इस्तेमाल करता है. जो आदमी को लगे तो उसके चीथड़े उड़ जाते हैं. गाड़ी पर लगे तो गाड़ी का देहावसान हो जाता है और अंत्येष्टि की आवश्यकता भी नहीं रह जाती. लेकिन ये मुए नक्सली उन तीरों का यूज करने लगे हैं. CRPF पर हमला हो या सुकमा में हमला दोनों जगह रैम्बो तीर के यूज की बात आई. लेकिन बकरे की अम्मा और नक्सलियों के आका. कब तक अनुपम सर का सरनेम (खेर=खैर) मनाएंगे? उस बम के बारे में भी कमांडोज होमवर्क करके जाएंगे.

अब कुल जमा सीन ऐसा है कि चाहे गुरिल्ला वार हो या फील्ड इंजीनियरिंग, जमीन के नीचे बम छुपा हो, उसको खोज के डिफ्यूज करना हो, या खाना न मिले और जंगल में एंवेई सर्वाइव करना हो. अपने कमांडो हर सिचुएशन के लिए फिट हैं. जीपीएस वगैरह से लेकर जितना भी अंग्रेजी में लड़ाई का सामान होता है. सब इनके पास है.

इंसास राइफल, एके राइफल्स, X-95 असाल्ट राइफल, ग्लॉक पिस्टल, हैकलर एंड कोच एमपी 5 सब‍ मशीनगन, कार्ल गुस्तासव राइफल सब यहीं मिलेंगे. और सुनो इलेक्ट्रॉनिक सर्विलॉन्स सिस्टम, स्नाइपर टीम जिनके पास ड्रेगुनॉव एसवीडी, माउजर SP66, हैकलर एंड कोच MSG-90 स्ना‍इपर राइफल्स और मल्टी ग्रेनेड लांचर ये सब होवे है. ये सब भी है. और एक बात कि इन्हें भारत की ही आर्डिनेन्स फैक्ट्री में बनाया जाता है.