1. आर्थिक और वित्तीय नीतियाँ — विकास को नई रफ्तार
GDP वृद्धि और आर्थिक संकेतक
2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 7% के आसपास दर्ज की गई, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। सरकार इसे अपनी “प्रो-ग्रोथ” नीतियों, बुनियादी ढांचा निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का परिणाम बता रही है। वैश्विक स्तर पर जहां कई अर्थव्यवस्थाएँ मंदी के दबाव से जूझ रही हैं, वहीं भारत को एक स्थिर और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
कर सुधार — नया टैक्स ढांचा
सरकार ने कर ढांचे को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से Income Tax Act, 1961 की जगह नया Income Tax Act, 2025 लागू करने की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना, विवाद कम करना और अनुपालन को आसान बनाना है।
GST प्रणाली में भी ‘नेक्स्ट-जन’ सुधारों की दिशा में काम किया गया है। दर संरचना को अधिक सुव्यवस्थित करते हुए 5% और 18% की दो प्रमुख श्रेणियों पर फोकस बढ़ाया गया है, जिससे छोटे कारोबारियों और उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
निवेश और व्यापार को प्रोत्साहन
सरकार ने छोटे व्यवसायों की परिभाषा में बदलाव करते हुए ₹100 करोड़ तक के वार्षिक टर्नओवर वाली कंपनियों को सरल नियमों के दायरे में शामिल किया है। इससे MSME सेक्टर को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की अनुमति देकर प्रतिस्पर्धा और पूंजी प्रवाह बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इससे बीमा सेवाओं की गुणवत्ता, नवाचार और कवरेज विस्तार की संभावनाएँ मजबूत हुई हैं।
2. बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर — मजबूत आधारभूत संरचना
2026 के केंद्रीय बजट में बुनियादी ढांचे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
रक्षा क्षेत्र में निवेश
रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। “मेक इन इंडिया” के तहत रक्षा उपकरणों के घरेलू निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी
रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, बंदरगाह और हवाई अड्डों के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट और 5G नेटवर्क विस्तार पर काम जारी है।
ऊर्जा क्षेत्र में हरित ऊर्जा परियोजनाओं — विशेषकर सौर और पवन ऊर्जा — को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़े।
3. प्रौद्योगिकी और नवाचार — AI से भविष्य की दिशा
तकनीक को विकास का मुख्य स्तंभ मानते हुए सरकार ने AI और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया है।
India AI Impact Expo 2026 का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में AI के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। यह पहल सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से संचालित की जा रही है।
AI आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से भारत को वैश्विक टेक हब के रूप में स्थापित करने का प्रयास जारी है।
4. वैश्विक रणनीति और कूटनीति
रूस और फ्रांस के साथ सहयोग
भारत और Russia के बीच रक्षा, व्यापार और स्वास्थ्य क्षेत्रों में 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई।
इसी प्रकार France के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे को आगे बढ़ाया गया है, जो भारत की रक्षा क्षमता को सुदृढ़ करेगा।
वैश्विक मंचों पर नेतृत्व
G20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने वैश्विक दक्षिण की आवाज उठाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त नीति और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को प्रमुखता दी है।
भारत की विदेश नीति “मल्टी-अलाइनमेंट” रणनीति पर आधारित है — यानी विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना।
5. सामाजिक और रोजगार नीतियाँ
ग्रामीण रोजगार और विकास
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ाने के लिए योजनाओं को सुदृढ़ किया है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कृषि सुधारों और ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण आय में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में “Namo Drone Didi Scheme” जैसी योजनाएँ महिलाओं को ड्रोन तकनीक और कृषि सेवाओं में प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
कौशल विकास और युवा रोजगार
स्किल इंडिया मिशन के तहत युवाओं को AI, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री Narendra Modi की 2025-26 की नीतियाँ स्पष्ट रूप से आर्थिक मजबूती, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रभाव को केंद्र में रखती हैं। कर सुधार, निवेश प्रोत्साहन, रक्षा आधुनिकीकरण, AI आधारित नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग — ये सभी कदम “विकसित भारत” की दिशा में एक समग्र रणनीति का हिस्सा हैं।
हालांकि चुनौतियाँ — जैसे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और रोजगार संतुलन — अभी भी मौजूद हैं, लेकिन सरकार का फोकस दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों पर है। आने वाले वर्षों में इन नीतियों का वास्तविक प्रभाव भारत की आर्थिक स्थिरता, सामाजिक समावेशन और वैश्विक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।